शकट चतुर्थी 2027: संतान की रक्षा का पावन व्रत
हिंदू धर्म में कई ऐसे व्रत और त्योहार हैं जो परिवार की खुशहाली और संतान के उज्ज्वल भविष्य से जुड़े होते हैं। इन्हीं में से एक सबसे महत्वपूर्ण और हृदयस्पर्शी व्रत है शकट चतुर्थी (जिसे सकट चौथ, तिलकुट चतुर्थी, माघी चौथ या संकष्टी चतुर्थी भी कहा जाता है)। यह व्रत मुख्य रूप से माताओं द्वारा संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और जीवन से आने वाली हर बाधा को दूर करने के लिए रखा जाता है।
शकट चतुर्थी 2027 की तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, शकट चतुर्थी 2027 में सोमवार, 25 जनवरी को मनाई जाएगी। यह माघ मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि होती है। चतुर्थी तिथि आमतौर पर दिन में शुरू होकर अगले दिन सुबह तक रहती है, इसलिए व्रत सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्रोदय के बाद (रात में चंद्रमा देखकर) पूरा किया जाता है।
शकट चतुर्थी का धार्मिक महत्व
यह व्रत भगवान गणेश (विघ्नहर्ता) और सकट माता को समर्पित है। मान्यता है कि इस दिन पूजा करने से संतान के जीवन में आने वाले सभी संकट (शकट) कट जाते हैं। माता-पिता अपनी संतानों के लिए चिंतित रहते हैं – उन्हें रोग, दुर्घटना या कोई विपत्ति न आए, इसी कामना से माताएं निर्जला या फलाहारी व्रत रखती हैं।
इस व्रत में तिल का बहुत महत्व है, इसलिए इसे तिलकुट चतुर्थी भी कहते हैं। तिल को शुभ माना जाता है और यह पितृदोष निवारण में भी सहायक होता है। चंद्रमा को अर्घ्य देने से चंद्र दोष भी दूर होता है, जिससे संतान का मानसिक विकास अच्छा होता है।
पूजा विधि – स्टेप बाय स्टेप
- सुबह का संकल्प: स्नान कर साफ वस्त्र पहनें। पूर्व या उत्तर दिशा में चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं।
- गणेश जी की स्थापना: गणेश जी की छोटी मूर्ति या चित्र स्थापित करें। 21 दूर्वा की गांठें, लाल फूल, सिंदूर, अक्षत, तिल, गुड़ और तिलकुट (तिल-गुड़ की मिठाई) चढ़ाएं।
- सामग्री: पान, सुपारी, लौंग-इलायची, जनेऊ, धूप, दीप, फल, मिठाई, गंगाजल, मेहंदी, चंदन आदि रखें।
- मंत्र जाप: “ॐ गं गणपतये नमः” का कम से कम 108 बार जाप करें।
- कथा सुनना: पूजा के बाद व्रत कथा अवश्य सुनें या पढ़ें।
- चंद्र दर्शन: रात में चंद्रोदय होने पर चंद्रमा को अर्घ्य दें (जल, फूल, अक्षत चढ़ाकर)।
- आरती: गणेश आरती और सकट माता की आरती करें।
- व्रत खोलना: चंद्र दर्शन के बाद फल या मिठाई ग्रहण करें।
पौराणिक व्रत कथा (एक लोकप्रिय संस्करण)
बहुत समय पहले की बात है, एक नगर में एक साहूकार और उसकी पत्नी रहते थे। दोनों बहुत धनवान थे, लेकिन संतान सुख नहीं था और वे बहुत दुखी रहते थे। एक दिन साहूकारनी पड़ोस में गईं, जहां सकट चौथ का व्रत चल रहा था और पड़ोसन कथा सुना रही थी।
कथा सुनकर साहूकारनी ने संकल्प लिया कि यदि उन्हें पुत्र रत्न प्राप्त हुआ तो वे हर साल यह व्रत रखेंगी। समय बीता, भगवान गणेश की कृपा से उन्हें एक सुंदर पुत्र हुआ। बच्चा बड़ा होने लगा, लेकिन एक दिन वह खेलते-खेलते जंगल में खो गया। दुःखी होकर मां रोने लगी, फिर उसे अपना संकल्प याद आया और उसने पुनः व्रत रखा तथा कथा सुनी।
भगवान गणेश प्रसन्न हुए और बच्चे को सकट माता की कृपा से लौटा दिया। तब से यह व्रत संतान रक्षा का प्रतीक माना जाने लगा। इस कथा से सीख मिलती है कि श्रद्धा और विश्वास के साथ की गई पूजा कभी व्यर्थ नहीं जाती।
शकट चतुर्थी 2027 – अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
शकट चतुर्थी का यह पावन व्रत माताओं के लिए भावनाओं का त्योहार है। इसे पूरे विश्वास और श्रद्धा के साथ करें, भगवान गणेश अवश्य आपकी मनोकामना पूरी करेंगे।
सभी पाठकों को शकट चतुर्थी 2027 की हार्दिक शुभकामनाएं!
जय गणेश! जय सकट माता!