Spiritual Stories
Siyaram Baba of Nimar: आइए जानते हैं श्री सियाराम बाबा के चमत्कार, जीवनी और सच्ची घटनाएं
महान संत श्री सियाराम बाबा
भट्याण आश्रम, नर्मदा तट, खरगोन (मध्य प्रदेश)
रहस्यमयी आगमन और मौन व्रत
श्री सियाराम बाबा ने 12 साल का मौन व्रत धारण किया था। कोई नहीं जानता था बाबा कहां से आए हैं। जब बाबा ने मौन व्रत तोड़ा तो उनका पहला शब्द "सियाराम" था, तब से गांव वाले उन्हें सियाराम बाबा कहते हैं।
बुजुर्गों के अनुसार बाबा 50-60 साल पहले यहां आए थे। ऐसा माना जाता है कि उनका जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में हुआ था और 7-8वीं तक पढ़ाई करने के बाद वैराग्य धारण कर हिमालय चले गए।
लंगोट में जीवन और रामायण पाठ
बाबा रोजाना 21 घंटे रामायण का पाठ करते हैं और बिना चश्मे के चौपाइयां पढ़ते हैं। संत बाबा के तन पर कपड़े के नाम पर केवल एक लंगोट होती है।
कड़ाके की ठंड हो, बरसात हो या फिर भीषण गर्मी, बाबा लंगोट के अतिरिक्त कुछ धारण नहीं करते। श्रद्धालुओं के अनुसार, बाबा ने 10 सालों तक खड़े रहकर तप किया था।
नर्मदा किनारे का रहस्यमयी मंदिर
ग्रामीणों के मुताबिक बाबा हनुमानजी के परम भक्त हैं। नर्मदा किनारे ही हनुमानजी का एक छोटा-सा मंदिर है, लेकिन किसी विवाद के चलते मंदिर को दीवार से पूरा ढंक दिया गया है।
आश्चर्य की बात यह है कि ग्रामीणों का कहना है कि मंदिर पर दीवार होने के बाद भी कान लगाने पर अंदर से घंटी की आवाज आती है।
दान में सिर्फ 10 रुपए
बाबा आश्रम में आने वाले श्रद्धालुओं से दान के रूप में सिर्फ 10 रुपए ही लेते हैं। अगर कोई ज्यादा रुपए चढ़ाता है तो सेवादार 10 रुपए लेकर बाकी लौटा देते हैं।
एक बार अर्जेंटीना और ऑस्ट्रिया से दर्शन करने आए विदेशियों ने 500 रुपए दान किए, लेकिन बाबा ने सिर्फ 10 रुपए रखकर बाकी पैसे उन्हें ससम्मान लौटा दिए।
निस्वार्थ समाज कल्याण
सियाराम बाबा समाज कल्याण में भी अपनी प्रमुख भागीदारी देते हैं। बाबा ने नर्मदा घाट की मरम्मत और बारिश से बचने के लिए शेड बनवाने के लिए 2 करोड़ 57 लाख रुपए दान में दिए थे। यह पैसा उन्हें आश्रम की डूब के मुआवज़े के रूप में सरकार द्वारा दिया गया था, जिसे उन्होंने जनहित में समर्पित कर दिया।