पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज
गौरी गोपाल की भक्ति का संदेश • सेवा का जीवंत उदाहरण
"सेवा ही परम धर्म है। भक्ति बिना सेवा के अधूरी है।"
भक्ति और आध्यात्म
राधा-कृष्ण की भक्ति में समर्पित, सरल भाषा में गहन शास्त्रों का ज्ञान देने वाले प्रख्यात कथावाचक
समाजसेवा
गौरी गोपाल आश्रम के संस्थापक, रोजाना 3000-5000 जरूरतमंदों को निःशुल्क भोजन और वृद्धों की सेवा
युवाओं के प्रेरणास्रोत
करोड़ों यूट्यूब सब्सक्राइबर, हास्य और व्यावहारिक उदाहरणों से जीवन की समस्याओं का समाधान
प्रारंभिक जीवन और परिवार
जन्म और बचपन
पूज्य महाराज जी का जन्म 27 सितंबर 1989 को मध्य प्रदेश के जबलपुर जिले के पनागर तहसील के रेवझा (रिव्झा) गांव में हुआ था। उनके पिता श्री राम नरेश तिवारी जी और माता श्रीमती छाया बाई एक साधारण धार्मिक परिवार से थे। बचपन से ही महाराज जी में भक्ति और सेवा की भावना गहरी थी।
भक्ति की शुरुआत
गांव के श्री राधा कृष्ण मंदिर में रोजाना जाना, भगवान की भक्ति में लीन होना – ये उनके जीवन की शुरुआती आदतें थीं। वे गाय चराने जाते समय हनुमान चालीसा और गीता का पाठ करते थे और अपने साथियों से भी करवाते थे। यह भक्ति बचपन से ही उनके हृदय में बस गई थी।
शिक्षा और ज्ञान
गरीबी और साधारण परिवेश में पले-बढ़े होने के बावजूद, उनकी आध्यात्मिक जिज्ञासा उन्हें वृंदावन जैसे पवित्र स्थानों की ओर खींच ले गई। उन्होंने भगवत आचार्य का कोर्स पूरा किया और शास्त्रों का गहन अध्ययन किया। लेकिन उनकी विशेषता यह है कि वे इन गहन शास्त्रों को आमजन की भाषा में, हास्य और रोजमर्रा के उदाहरणों से समझाते हैं।
वर्तमान परिवार
महाराज जी के परिवार में कुल 6 सदस्य हैं - उनकी पत्नी आरती तिवारी (जिन्हें भक्त "गुरु मां" कहते हैं), दो बच्चे और उनके माता-पिता। उनकी पत्नी भी भजन गाती हैं और सामाजिक व धार्मिक कार्यों में सक्रिय रहती हैं।
आध्यात्मिक यात्रा और कथा वाचन
भगवान को पाने के लिए बड़े-बड़े तप नहीं करने पड़ते, बस सच्चा प्रेम और समर्पण चाहिए। जैसे गोपियां कृष्ण से प्रेम करती थीं, वैसे ही हम भी करें।
सामाजिक कार्य: सेवा ही सच्ची भक्ति
अन्नपूर्णा रसोई
सबसे प्रमुख सेवा है अन्नपूर्णा रसोई, जो 30 जून 2020 से शुरू हुई। महाराज जी कहते हैं, "अन्न दान सबसे बड़ा दान है, क्योंकि अन्न से ही जीवन चलता है।"
वृद्ध आश्रम
गौरी गोपाल वृद्ध आश्रम में सैकड़ों वृद्ध माताएं-पिता रहते हैं, जिन्हें उनके अपने बच्चों ने त्याग दिया था। महाराज जी ने संकल्प लिया कि ऐसे वृद्धों को आश्रय देंगे।
गौशाला
गौशाला में गौ माताओं की सेवा होती है। महाराज जी कहते हैं कि गौ माता में सभी देवताओं का वास है और उनकी सेवा से सभी मंगल कामनाएं पूरी होती हैं।
बंदर सेवा
एक अनोखी सेवा है बंदर सेवा – वृंदावन में बंदरों को नियमित रूप से चने, केले और रोटी खिलाना, जो पर्यावरण संरक्षण और प्राणी सेवा का भी हिस्सा है।
शिक्षाएं जो जीवन बदल देती हैं
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1
भक्ति और प्रेम
राधा-कृष्ण का प्रेम सिखाते हैं। कहते हैं कि भगवान को प्रसन्न करने का सबसे आसान तरीका है नाम जप और प्रेम।
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2
सेवा का महत्व
"सेवा ही परम धर्म है। दूसरों की मदद करो, भगवान खुद तुम्हारी मदद करेंगे।"
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3
संस्कार और परिवार
आज के युवाओं को संस्कार सिखाते हैं। माता-पिता की सेवा, परिवार का महत्व बताते हैं।
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4
संकट में धैर्य
"जो होता है, अच्छे के लिए होता है। भगवान पर भरोसा रखो।"
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5
हास्य और सकारात्मकता
जीवन को गंभीरता से नहीं, मुस्कान से जियो। सकारात्मक दृष्टिकोण से हर समस्या का समाधान मिल जाता है।
प्रभाव और लोकप्रियता
पूज्य श्री अनिरुद्धाचार्य जी महाराज आज के युग के सच्चे संत हैं। उनकी वाणी अमृत है, सेवा प्रेरणा है और भक्ति मार्ग है। यदि आप जीवन में शांति और सुख चाहते हैं, तो उनकी कथाएं सुनें, गौरी गोपाल का नाम जपें और सेवा में लग जाएं।
सामान्य प्रश्न (FAQs)
🙏 अपने जीवन में शांति और सुख लाएं 🙏
पूज्य महाराज जी की कथाएं सुनें, गौरी गोपाल का नाम जपें और सेवा में लग जाएं। जीवन को सार्थक और आनंदमय बनाएं।
आश्रम से जुड़ेंयह लेख सूचना और प्रेरणा के उद्देश्य से लिखा गया है। यह सार्वजनिक स्रोतों पर आधारित है और पूर्णतः मूल सामग्री है। किसी भी तथ्यात्मक त्रुटि के लिए लेखक जिम्मेदार नहीं है। यह आधिकारिक बयान नहीं है। कृपया सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतों से पुष्टि करें। इस लेख का उद्देश्य किसी भी धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं है। सभी जानकारी केवल शैक्षिक और सूचनात्मक उद्देश्यों के लिए प्रदान की गई है।
