माघ पूर्णिमा हिंदू धर्म की प्रमुख तिथियों में से एक है। यह माघ मास की पूर्णिमा को मनाई जाती है और इसे माघी पूर्णिमा भी कहा जाता है। वर्ष 2027 में माघ पूर्णिमा 20 फरवरी 2027, शनिवार को पड़ रही है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि 20 फरवरी को सुबह लगभग 8 बजे शुरू होकर 21 फरवरी को सुबह तक रहेगी। इस दिन चंद्रोदय शाम करीब 5:41 बजे होगा। यह दिन स्नान, दान, पूजा और व्रत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
माघ मास स्वयं में बहुत पवित्र होता है। धार्मिक ग्रंथों में कहा गया है कि माघ मास में किया गया हर कार्य फलदायी होता है। विशेष रूप से पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। प्रयागराज (इलाहाबाद) में संगम पर इस दिन लाखों श्रद्धालु स्नान करते हैं। माघ पूर्णिमा माघ मेला का समापन दिवस भी होता है।
माघ पूर्णिमा का महत्व
माघ पूर्णिमा का महत्व असीम है। पुराणों में वर्णन है कि माघ मास में गंगा स्नान करने से व्यक्ति के सभी पाप धुल जाते हैं। यह दिन भगवान विष्णु, चंद्रदेव और पितरों को समर्पित होता है। इस दिन किए गए दान का पुण्य अक्षय होता है।
शास्त्रों के अनुसार माघ पूर्णिमा पर सूर्य मकर राशि में और चंद्रमा कर्क राशि में होता है। इस योग में स्नान-दान से कुंडली में सूर्य और चंद्र से जुड़ी दोष दूर होते हैं। ज्योतिष शास्त्र में यह दिन शक्ति और स्वास्थ्य प्रदान करने वाला माना जाता है।
इसके अलावा बौद्ध धर्म में भी माघ पूर्णिमा का विशेष महत्व है। मान्यता है कि गौतम बुद्ध ने इसी दिन अपनी मृत्यु की घोषणा की थी। सिख धर्म में भी इस दिन को माघी के रूप में मनाया जाता है।
माघ पूर्णिमा की पौराणिक कथाएं
माघ पूर्णिमा से जुड़ी कई कथाएं प्रचलित हैं। एक प्रमुख कथा भगवान विष्णु और माघ स्नान से जुड़ी है। कहा जाता है कि एक बार देवता और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया। उसमें अमृत निकला, लेकिन विष भी निकला। भगवान शिव ने विष पी लिया। इससे उनका कंठ नीला पड़ गया। तब भगवान विष्णु ने माघ मास में स्नान करने का महत्व बताया और कहा कि इससे सभी कष्ट दूर होते हैं।
एक अन्य कथा गुरु रविदास जी से जुड़ी है। गुरु रविदास का जन्म माघ पूर्णिमा को ही माना जाता है। इसलिए इस दिन उनकी जयंती भी मनाई जाती है। उनकी शिक्षाएं समानता और भक्ति पर आधारित हैं।
एक लोक कथा है जिसमें एक ब्राह्मण दंपति की कहानी है। ब्राह्मण बहुत गरीब था। उसकी पत्नी ने माघ पूर्णिमा पर व्रत रखा और दान किया। इससे उनके घर में धन-संपदा आई और वे सुखी हुए। यह कथा बताती है कि इस दिन किया गया दान कभी व्यर्थ नहीं जाता।
माघ पूर्णिमा व्रत और पूजा विधि
माघ पूर्णिमा का व्रत बहुत सरल लेकिन पुण्यदायी है। व्रत करने वाले सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं। अगर संभव हो तो गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करें। घर पर ही पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान कर सकते हैं।
स्नान के बाद सूर्य को अर्घ्य दें। फिर भगवान विष्णु की पूजा करें। विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें या “ओम नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जप करें। हनुमान जी की भी पूजा करें क्योंकि माघ नक्षत्र का स्वामी बृहस्पति है और हनुमान जी बृहस्पति के अवतार माने जाते हैं।
दिनभर फलाहार या निराहार व्रत रखें। शाम को चंद्रोदय के समय चंद्रमा को दूध, चावल और सफेद मिठाई का भोग लगाएं। अर्घ्य दें और “ओम सोम सोमाय नमः” मंत्र बोलें।
दान का विशेष महत्व है। इस दिन गाय, भूमि, तिल, कपड़े, अन्न आदि का दान करें। ब्राह्मणों को भोजन कराएं। गरीबों को मदद करें।
विशेष स्थान और मेला
प्रयागराज का संगम इस दिन सबसे महत्वपूर्ण स्थान है। यहां माघ मेला चलता है और पूर्णिमा को मुख्य स्नान होता है। लाखों लोग यहां आकर स्नान करते हैं। मान्यता है कि यहां स्नान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है।
काशी, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में भी इस दिन विशेष स्नान होते हैं। दक्षिण भारत में तमिलनाडु में इस दिन फ्लोट फेस्टिवल मनाया जाता है जहां मीनाक्षी और सुंदरेश्वर की मूर्तियों को नाव पर सजाया जाता है।
माघ पूर्णिमा के लाभ
इस दिन व्रत और स्नान करने से मानसिक शांति मिलती है। रोगों से मुक्ति मिलती है। कुंडली के दोष दूर होते हैं। पितरों को शांति मिलती है। दान से पुण्य बढ़ता है। परिवार में सुख-समृद्धि आती है।
आधुनिक जीवन में भी माघ पूर्णिमा का महत्व है। इस दिन प्रकृति से जुड़कर ध्यान करने से तनाव कम होता है। चंद्रमा की पूजा से मन शांत रहता है।
माघ पूर्णिमा पर क्या करें और क्या न करें
करें: स्नान, पूजा, दान, जप, पितर तर्पण। न करें: मांस-मदिरा, क्रोध, झूठ, किसी का अपमान।
माघ पूर्णिमा 2027 एक ऐसा पावन अवसर है जो हमें अपने जीवन को शुद्ध करने और पुण्य कमाने का मौका देता है। 20 फरवरी 2027 को इस दिन का पूरा लाभ उठाएं। स्नान करें, दान करें और भगवान का स्मरण करें। इससे जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
माघ पूर्णिमा 2027 कब है?
20 फरवरी 2027, शनिवार को। पूर्णिमा तिथि 20 फरवरी सुबह से 21 फरवरी तक रहेगी।
माघ पूर्णिमा का व्रत कब रखा जाता है?
मुख्य रूप से 20 फरवरी को, चंद्रोदय तक व्रत रखा जाता है।
माघ पूर्णिमा पर क्या करना चाहिए?
पवित्र स्नान, दान, पूजा, विष्णु सहस्रनाम पाठ और चंद्रमा को अर्घ्य देना चाहिए।
माघ पूर्णिमा का सबसे पवित्र स्थान कौन सा है?
प्रयागराज का त्रिवेणी संगम। यहां माघ मेला में मुख्य स्नान होता है।
क्या घर पर रहकर भी माघ पूर्णिमा का व्रत किया जा सकता है?
हां, गंगाजल मिलाकर स्नान करके पूजा और दान कर सकते हैं।
माघ पूर्णिमा पर कौन से देवता की पूजा की जाती है?
मुख्य रूप से भगवान विष्णु, हनुमान जी और चंद्रदेव की।
माघ पूर्णिमा पर कौन सा दान सबसे उत्तम है?
गाय, अन्न, तिल, कपड़े और ब्राह्मण भोजन।
क्या माघ पूर्णिमा पर उपवास अनिवार्य है?
नहीं, लेकिन पुण्य के लिए फलाहार या निराहार व्रत रखना शुभ है।
माघ पूर्णिमा और गुरु रविदास जयंती में क्या संबंध है?
गुरु रविदास जी का जन्म माघ पूर्णिमा को माना जाता है, इसलिए दोनों एक साथ मनाए जाते हैं।
माघ पूर्णिमा पर चंद्रमा को अर्घ्य क्यों दिया जाता है?
चंद्रमा पूर्णिमा का स्वामी है और उसकी पूजा से मन शांत होता है।
क्या 2027 में प्रयागराज में कुंभ मेला होगा?
नहीं, अगला महाकुंभ 2025 में था। 2027 में सामान्य माघ मेला होगा।
माघ पूर्णिमा का ज्योतिषीय महत्व क्या है?
सूर्य-चंद्र के विशेष योग से कुंडली के दोष दूर होते हैं।
बौद्ध धर्म में माघ पूर्णिमा का क्या महत्व है?
गौतम बुद्ध ने इसी दिन अपनी निर्वाण तिथि की घोषणा की थी।
माघ पूर्णिमा पर क्या नहीं खाना चाहिए?
मांस, मदिरा, लहसुन-प्याज आदि तामसिक भोजन से परहेज करें।
माघ पूर्णिमा व्रत से क्या लाभ मिलता है?
पाप नाश, स्वास्थ्य, मानसिक शांति, पुण्य प्राप्ति और मोक्ष मार्ग प्रशस्त होता है।
Disclaimer: यह लेख सामान्य जानकारी और प्रमुख पंचांगों पर आधारित है। पूर्णिमा तिथि और मुहूर्त स्थान के अनुसार थोड़े भिन्न हो सकते हैं। सटीक जानकारी के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान ज्योतिषी से परामर्श करें। किसी भी धार्मिक कार्य से पहले विशेषज्ञ सलाह लें।
